संदेश

रात की गहरी घड़ियां

रात की गहरी घड़ियों में धरती सांस लेती है। किसी ने सुना है उसके सीने से आती सांसों की आवाजों को वो जख्म सीती है अपने रात भर ताकि नई जख्मो के लिए तैयार हो सके नई सुबह

बेवक्त सब जिते है।

वक्त के साथ कोई नही ज़िता, बेवक्त सब जिते है। ख्याल सवा उम्र तक जिते है , रिश्ते पूण तक छलावे जिंदगी भर जी जाते है, और साये रात तक वफ़ादारियाँ कीमतों से ज़िती है और भरोसे धोखे तक मो...

सेपियंस

'युवाल नोआ हरारी'  की किताब  "सेपियंस"  में मनुष्य की साझी कल्पना के बारे में बताया गया है की कैसे कुछ मिथकों में साझा विश्वास करने की वजह से लाखों अपरिचित मनुष्य भी एक साथ सहय...

आरम्भिक मनुष्य

मामूली घास के दानों के मोह में मनुष्य ने अपनी प्राकृतिक आज़ादी से खुशी-खुशी समझौता कर लिया था। पहले मैदानों में खेत बने फिर उनके इर्दगिर्द छोटी मानवीय बस्तियां, फिर सामूहि...

बारिशें

पेड़ो पर पत्तें आए कई वर्ष बीत गये, अब तो ठूंठ भी सूखकर गिर गए। हरियाली आँखों को सालों से नसीब नहीं हुई। लुप्त हो चुके गिद्धों के झुंड जाने कहाँ से फिर लौट आए। नीयति ने उनके दिन...

डार्विन का विकासवाद

Sunday, April 27, 2008 "डार्विन के चूल्हे पर जीवन की खिचड़ी" इंटरनेट पर एक निठल्ली सर्फिंग के दौरान आज डार्विन साहब से मुलाकात हो गई. अब ये मत पूछिए कि डार्विन कौन? डार्विन यानि चार्ल्स रॉबर्ट ...

सेपियंस 1

" 20 लाख वर्ष पहले पूर्वी अफ्रीका की पदयात्रा करते हुए शायद आप का सामना मानव चरित्रों की चिर-परिचित भूमिकाओं से हो सकता था;- शिशुओं को सीने से लगाए चिंतित माताएं और मिट्टी में ख...