संदेश

सेपियंस 1

" 20 लाख वर्ष पहले पूर्वी अफ्रीका की पदयात्रा करते हुए शायद आप का सामना मानव चरित्रों की चिर-परिचित भूमिकाओं से हो सकता था;- शिशुओं को सीने से लगाए चिंतित माताएं और मिट्टी में ख...

मैं तुमको विश्वास दु।

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मैं तुमको विश्वास दुं  मैं तुमको विश्वास दुं , तुम मुझको विश्वास दो शंकाओं के सागर हम हर जायेंगे। मरुधरा को मिलाकर स्वर्ग बनायेंगे। प्रेम बिना यह जीवन तो अनजाना है। सब ...

बच्चों की भाषा

शिक्षण में नवाचार सम्बन्धी मेरा आईडिया प्राथमिक शिक्षा को लेकर है। दरअसल प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षण के दौरान मुझे ऐसा लगा कि कुछ बच्चें ऐसे होते है जो चीज़ो के बारे में ब...

बच्चों की हेण्डराइटिंग........!

  हेण्डराइटिंग को जैसे दो मुक्तलिफ़ इंसानों के हाथों  की लकीरें एक सी नही होती ! नही होते समान पैरों के निशान कही;  एक सा नही होता दुनिया मे बहुत कुछ  वैसे ही सबकी लिखावट भी कहा...

बालिकाओं के हिस्से के दिन...!

बालिकाएं और उनके हिस्से के दिन........! महिला, बेटी और बालिका दिवस जैसे राष्ट्रीय और वैश्विक दिनों को मनाने से भला क्या फायदा रहा होगा ....! ऐसे दिवसों की उपयोगिता कितनी है और कितनी आग...

भगत सिंह का खत सुखदेव को

2 भगत सिंह का पत्र सुखदेव के नाम भगत सिंह लाहौर के नेशनल कॉलेज के छात्र थे। एक सुंदर-सी लड़की आते जाते उन्हें देखकर मुस्कुरा देती थी और सिर्फ भगत सिंह की वजह से वह भी क्रांतिक...

अब्राहम लिंकन.....का पत्र

आदरणीय गुरु जी,  मैं जानता हूँ कि मेरा बेटा देर –सबेर यह जान ही जाएगा कि सब लोग न ईमानदार होते हैं, और न सत्य के प्रति निष्ठावान होते हैं,पर आप उसे यह अवश्य सिखाएं कि हर दुष्ट व्यक्ति को सबक सिखाने के लिए कोई न कोई हीरो भी होता है,स्वार्थी राजनीतिज्ञों की नकेल कसने के लिए कोई न कोई समर्पित निष्ठावान नेता भी होता है,समाज में जहाँ शत्रु होते हैं, वहीँ मित्र भी होते हैं.और चाहे जितना समय लगे, पर उसे यह  अवश्य सिखाएं कि मेहनत से कमाया एक रुपया मुफ्त में प्राप्त करोड़ों से कहीं अधिक मूल्यवान है. उसे सिखाइए कि  जीवन में हार और जीत दोनों मिलती हैं, इसलिए न हार से निराश हो और न जीत से उन्मत्त हो. ईर्ष्या – द्वेष से दूर रहे, और हर्ष को हमेशा संयत ढंग से व्यक्त करे.गुंडों के सामने कभी घुटने न टेके, याद रखे कि उन्हें शिकस्त देना कठिन नहीं होता.उसे महान ग्रंथों के अद्भुत वैभव से परिचित कराइए,साथ ही उसे प्रकृति के अनंत सौंदर्य का आस्वादन करने की प्रेरणा दीजिए, आकाश की थाह लेने को आतुर पक्षियों का, सुनहरी धूप को गुंजायमान करते भ्रमरों का, पर्वतों के शिखर और ढलान पर एक ही भाव से मुस्करात...