संदेश

जिंदगी...!

रॉस की मॉम- "असल में आप रहते कहाँ है मिस्टर डॉन्सन" जेक डॉन्सन- "वैसे तो फ़िलहाल मेरा पता है IRNS टाइटैनिक और इसके बाद ईश्वर चाहे जहाँ ले जाए! " और आप पैसे कहाँ से जुटाते हैं ! "मैं जगह-जगह...

पूर्व चलने के बटोही...। हरिवंश राय बच्चन

पूर्व चलने के बटोही, बाट की पहचान कर ले पुस्तकों में है नहीं छापी गई इसकी कहानी, हाल इसका ज्ञात होता है न औरों की ज़बानी, अनगिनत राही गए इस राह से, उनका पता क्या, पर गए कुछ लोग इस प...

आषाढ़ का एक दिन

मधुल , धूसर , काले - मटमैले मेघों से बनती अनिश्चित अजीबोगरीब आकृतियों और सपाट क्षैतिज तक जाकर बरसते बादलों की गड़गड़ाहट के बीच ' मोहन राकेश   ' का नाटक - "आषाढ का एक दिन"   पढ़ना ;  यकायक  पहली बारिश में भींग जाने जैसे अहसासों से भर देता है ग्राम प्रान्त की पर्वत शिखाओं, तलहटियों  , हरण्यशावको और मल्लिका को छोड़कर ' कालीदास '  का उज्जयिनी चले जाना। जमीन से उखड़ जाने के द्वंद्व। अंबिका की चिंताएं। प्रियंगुमंजरी का मल्लिका से संवाद।  वक्त की स्पर्द्धाओं और किस्मत की दुष्वारियों से लोटती परछाइयां और अंत में लोट आने पर भी सब खो देना। मोहन राकेश ने अस्तित्ववाद के विसंगतीबोध को पूरे कथानक में पिरो दिया है। किसी को भी चुनने का अर्थ है किसी एक को न चुन पाने का अफ़सोस। एक के होने और दूसरे के खो जाने की विसंगति , अधूरेपन की पीड़ा पूरे नाटक में आद्यंत व्याप्त है। विखंडित व्यक्तित्व कालीदास कि दूसरी त्रासदी है। मन ग्रामप्रान्त के रमणीय वातावरण और मल्लिका के साथ रमता है किंतु राजसी वैभव व सांसारिक सफलताएं अपनी और खिंचती है। यही असंगति जीवन को अकाट्य तर्क बना देती है। ...

"You Start Dying Slowly "

# ब्राज़ील की कवयित्री 'Martha Medeiros' की कविता "You Start Dying slowly" सोशियल मिडिया पर विश्व कवि "पाब्लो नेरूदा"  के नाम से खुब शेयर की गई।  जो प्रेम और क्रांति के कवि  "पाब्लो नेरूदा" की प्रसिद्धि और ख्यात...

You Star Dying Slowly..!

# पाब्लो नेरुदा -12 July सही मायने में जनकवि शायद वही होता है जो प्यार को क्रांति और क्रांति को प्यार मानता है, उन्हें अलग नहीं बल्कि एक ही नदी की दो लहरों की तरह देखता है- जो बहती है ज...

अनकहें ज्जबात

जिन्दगी के बहुत से किस्सें इस तरह से लिखे होते है।  जिस तरह से नकल करने की चिट पर प्रश्नों के उत्तर लिखे होते है। जो हमें तो समझ में आते है पर पूरी दुनिया को नही। - हर उम्र अपने अ...

एक चिकू वाला,

आपने कभी सब्जी बेची है? नही बेची! आज से पहले मैंने भी नही बेची थी, पर आज कुछ देर के लिए ही सही मैं चिकू वाला बन गया। हुआ यूं की पढकर जब में अपने कमरे की तरफ लोट रहा था तो, सड़क के किन...