तुमसे निभ जाए वही जिंदगी नही।

तुमसे निभ जाए वही जिंदगी नही
जीने के मकसद और भी है।

हादसों की अपनी नियत,  लेकिन
तुम्हारे सिवाय किस्मत और भी है।

जिन्हें दुनिया के साथ चलने का रंज नही
उनके  मुकामों के बिना सफ़र और भी है।

एक पहलू ही नही होता ख्वाब का
ख्वाबों के पहलू और भी है।

सफेद या काले ही नही होते लोग
दुनिया-ए-गुलशन में रंग और भी है।

बुरा हुआ जो ; ये हार गए, लेकिन
उठो जँगजुओ जितने को दुनिया मे सल्तनतें और भी है

तेरे किस दुःख पे रोई जिंदगी , लेकिन
जो मुस्कुराने की वजह और भी है।

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--"सुभाषचंद्र बोस-"