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एक याद किस्सा, शान्ति लाल गुप्ता जी

   एक याद किस्सा  -" डॉ.शांतीलाल गुप्ता "           - दीवाली के एक दिन पहले जयपुर से घर जाने के लिए निकला। सिंधी कैंप से पाँच रूपये की एक कटिंग चाय खरीद कर रोडवेज बस की सीट पर बैठा ह...

पगडंडियां

शाम के धीमे अँधेरें में दूर से आती गाडियाँ रेंगती हुई सी लग रही थी। पी पी की आवाजों के बीच ट्रक में चलते राजा हिन्दुस्तानी के गाने  " परदेशी परदेश जाना नही" और रक्शें में बजते " ...