" ऐ जिन्दगी मेरी....
पीछवाड़े के नीम की झुकी टहनियों सी कच्चें घरों की सुन्नी पड़ी देहलियों सी सिसकती रातों में हिचकियों सी ऐ जिन्दगी मेरी, तुम कैसी हो री ? तुम हो ख्वाबों में नींद प्रियसी जैसी ...
तलाश एक शब्द नही, तलाश एक नजर है। तलाश एक क्षण नही , तलाश मुझको हर पल है। क्योंकि जीवन पूर्णता नही है, जीवन निपूर्णता भी नही है। जीवन एक सफ़र है जिसे आप तय कर रहे होते है। साबिर का एक शेर है कि "सभी मुसाफ़िर चलें अगर एक रुख़ तो क्या है मज़ा सफ़र का , तुम अपने इम्काँ तलाश कर लो मुझे परिंदे पुकारते हैं। - Ishwar Gurjar Email- ishwargurjar9680@gmail.com